गोपबंधु पुस्तकालय में गोपबंधु जयंती मनाई गई

 गोपबंधु पुस्तकालय में गोपबंधु जयंती मनाई गई

राउरकेला के छेंड़ कॉलोनी में स्थित गोपबंधु पुस्तकालय एवं स्वस्ति साहित्य संसद के सहयोग से आयोजित एक भव्य समारोह में उत्कलमणि गोपबंधु दास की 146वीं जयंती मनाई गई। सुबह सदस्यों ने पुस्तकालय के सामने और नगर के आरंभ में गोपबंधु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
शाम को पुस्तकालय के सत्यवादी कक्ष में सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिलापाल महेंद्र कुमार पटनायक की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों ने गोपबंधु के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि दी। डा.सुशांत कुमार मणि और मनबोध मिश्रा ने अतिथियो के लिए स्वागत संगीत दिया।  

पुस्तकालय के संपादक डॉ.  गिरिजा शंकर गोस्वामी ने स्वागत भाषण दिया जबकि कोषाध्यक्ष लक्ष्मण नाथ दास ने अतिथियों का परिचय दिया।  अपने भाषण में, श्री पटनायक ने कहा कि गोपबंधु दास त्याग, सेवा और आदर्शों के लिए समर्पित व्यक्ति थे।  वह एक राष्ट्रवादी नेता, एक लड़ने वाले व्यक्ति, एक नैतिक नायक और देश के सेवक थे।  स्वस्ति के महासंपादक ने कवि राजीव मणि गोपबंधु को रूसी आत्मा का क्रांतिकारी निर्माता और सत्य विचार चेतना का साहित्य कहा।  मुख्य अतिथि राउरकेला स्टील प्लांट के सेवानिवृत्त कार्यकारी निदेशक भारत भूषण मोहंती ने गोपबंधु को भारतीय संस्कृति और परंपरा का समर्पित देशभक्त, आध्यात्मिक दिमाग वाला देशभक्त बताया।  मुख्य वक्ता इतिहास के प्रोफेसर डॉ.  पंगम कुमार मलिक ने गोपबंधु के साहित्य पर मानवतावाद की उपाधि से प्रकाश डाला और कहा कि गोपबंधु की चेतना ब्रह्मांड में चमकती है।  उनके विस्तार और खुलेपन ने उन्हें उदार, सार्वजनिक और मानवीय बना दिया।  उन्होंने अपनी कविता में अपने हितों को त्यागने और दुनिया के कल्याण के लिए रक्त की एक एक बूंद बहाने का आह्वान किया।  उनके निबंध और कविताएं डॉ.  मौली ने पेश की।
 दूसरे चरण में गोपबंधु द्वारा लिखित कविताओं की प्रस्तुति त्रिलोचन स्वैन, विजयलक्ष्मी पटनायक, मिंकेतन पशायत, अशोक कुमार पटनायक, सुप्ति कारा, रश्मि साहू, काशीनाथ नंदी, सुशांत कुमार नाइक, नरसिंह चरण वाशाल, आशालता दास, विश्वनाथ जेना, राजकुमार ने की।

कार्यक्रम का संचालन स्वस्ति उपाध्यक्ष राजकुमार मोहंती ने किया जबकि पुस्तकालय के महासंपादक हरिहर शतपति ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।  हरिहर के नायक, रवींद्र कुमार सराफ, कैलाश चंद्र सामल, बैकुंठ नाथ साहू ने प्रमुख समर्थन प्रदान किया। इस कार्यक्रम में दोनों संस्थानों के  सदस्यों एवं शहर के कई बुद्धिजीवी शामिल हुए।